Tuesday, February 27, 2024
Samas (समास)

Samas Kise Kahate Hain – समास की परिभाषा

Samas Kise Kahate Hain : दोस्तों आज हमने समास के बारे में Blog लिखा है। इस Blog में हमने समास किसे कहते हैं, समास के भेद इत्यादी के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हिंदी व्याकरण का एक प्रारंभिक गाइड के रूप में samas ki paribhasha के बारे में बताएंगे। यह आपको समास की पहचान, प्रकार, और प्रयोग के संबंधित ज्ञान प्रदान करेगा। हम अलग-अलग पैराग्राफ में तत्पुरुष समास, कर्मधारय समास, द्विगु समास, द्वन्द्व समास, बहुव्रीहि समास, अव्ययीभाव समास को विस्तार से देखेंगे और उनके उदाहरण भी देंगे। इस पोस्ट को पढ़कर आप समास की परिभाषा, पहचान, और प्रयोग के बारे में अधिक समझ पाएंगे।

Samas Kise Kahate Hain – समास की परिभाषा

दो या दो से अधिक शब्दों के योग से नवीन शब्द बनाने की विधि (क्रिया) को समास कहते हैं। इस विधि से बने शब्दों का समस्त-पद कहते हैं। जब समस्त-पदों को अलग-अलग किया जाता है, तो इस प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं।

जैसे-

  • चरणकमल – कमल के समान चरण
  • नीलकंठ– नीला है जो कंठ
  • चौराहा- चार राहों का समूह

Samas Kise Kahate Hain - समास की परिभाषा

samas ke bhed: समास के कुल भेद

  1. तत्पुरुष समास
  2. कर्मधारय समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वन्द्व समास
  5. बहुव्रीहि समास
  6. अव्ययीभाव समास

1. तत्पुरुष समास(Tatpurush Samas Ki Paribhasha)

Tatpurush Samas Ki Paribhasha – समास का वह रूप जिसमें द्वितीय पद या उत्तर पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। तत्पुरुष समास में प्रथम पद संज्ञा या विशेषण होता है और लिंग-वचन का निर्धारण अंतिम या द्वितीय पद के अनुसार होता है। तत्पुरुष समास में पूर्व पद एवं पर पद के मध्य कारक चिन्हों का लोप होता है और जब सामासिक पद का समास-विग्रह किया जाता है, तो कर्ता कारक एवं सम्बोधन कारक को छोड़कर शेष कारकों के कारक चिन्हों का प्रयोग किया जाता है।

जैसे: गंगा जल लाओ। इस वाक्य को सुनकर, सुनने वाला ‘गंगा’ को नहीं ला सकता, बल्कि केवल ‘जल’ लेकर आएगा। अतः गंगाजल सामासिक पद में प्रथम पद ‘गंगा’ प्रधान न होकर द्वितीय पद ‘जल’ प्रधान है, इसलिए यहाँ तत्पुरुष समास होगा।

तत्पुरुष समास के उदाहरण (tatpurush samas ke udaharan)

  • स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त
  • दिल तोड़ = दिल को तोड़ने वाला
  • शरणागत = शरण को आया हुआ
  • अकालपीड़ित = अकाल से पीड़ित
  • तुलसीकृत = तुलसीदास द्वारा किया हुआ
  • कष्टसाध्य = कष्ट से साध्य
  • देशभक्ति = देश के लिए भक्ति
  • घुड़साल = घोड़ों के लिए साल (भवन)
  • सभामंडप = सभा के लिए मंडप
  • गुणरहित = गुण से रहित
  • जन्मान्ध = जन्म से अन्धा
  • पापमुक्त = पाप से मुक्त
  • राजसभा = राजा की सभा
  • चर्मरोग = चर्म का रोग
  • जलधारा = जल की धारा
  • आत्मनिर्भर = स्वयं पर निर्भर
  • कविराज = कवियों में राजा
  • सिरदर्द = सिर में दर्द
  • आपबीती = अपने पर बीती हुई

2. कर्मधारय समास(Karmdharay Samas)

जिसका पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य अथवा एक पद उपमान तथा दूसरा पद उपमेय हो तो, वह ‘कर्मधारय समास‘ कहलाता है।

karmadharaya samas ke udaharan

विशेषण–विशेष्य :

  • नीलकमल – नीला है जो कमल
  • पुरुषोत्तम – पुरुषों में है जो उत्तम
  • परमानंद – परम है जो आनंद
  • भलामानस – भला है जो मानस
  • लालटोपी – लाल है जो टोपी
  • महाविद्यालय – महान है जो विद्यालय
  • अधपका – आधा है जो पका
  • महाराज – महान है जो राजा
  • पीतांबर – पीत है जो अंबर
  • महावीर – महान है जो वीर
  • महापुरुष – महान है जो पुरुष
  • प्रधानाध्यापक – प्रधान है जो अध्यापक
  • कापुरुष – कायर है जो पुरुष
  • नीलकंठ – नीला है जो कंठ
  • कालीमिर्च – काली है जो मिर्च
  • महादेव – महान है जो देव
  • श्वेतांबर – श्वेत है जो अंबर (वस्त्र)
  • सद्धर्म – सत् है जो धर्म
  • नीलगगन – नीला है जो गगन
  • अंधकूप – अंधा है जो कूप
  • लालछड़ी – लाल है जो छड़ी
  • नीलांबर – नीला है जो अंबर
  • सज्जन – सत है जो जन
  • कृष्णसर्प – कृष्ण है जो सर्प
  • महात्मा – महान है जो आत्मा
  • दुरात्मा – दुर् (बुरी) है जो आत्मा
  • कुबुद्धि – कु (बुरी) है जो बुद्धि
  • पर्णकुटी – पर्ण से बनी कुटी
  • प्रधानमंत्री – प्रधान है जो मंत्री

उपमान–उपमेय:

  • देहलता – लता रूपी देह
  • चंद्रमुख – चंद्र के समान मुख
  • विद्याधन – विद्या रूपी धन
  • कमलनयन – कमल के समान नयन
  • वचनामृत – अमृत रूपी वचन
  • क्रोधाग्नि – क्रोध रूपी अग्नि
  • संसारसागर – संसार रूपी सागर
  • ग्रंथरत्न – ग्रंथ रूपी रत्न
  • करकमल – कर रूपी कमल
  • कुसुमकोमल – कुसुम सा कोमल
  • मृगलोचन – मृग के समान लोचन
  • चरणकमल – कमल के समान चरण
  • भुजदंड – दंड के समान भुजा
  • कनकलता – कनक के समान लता
  • घनश्याम – घन के समान श्याम (काला)
  • विद्याधन – विद्या रूपी धन
  • भवजल – भव रूपी जल
  • आशालता आशा की लता
  • नरसिंह नर रूपी सिंह
  • प्राणप्रिय – प्राणों के समान प्रिय
  • स्त्रीरत्न – स्त्री रूपी रत्न

3. द्विगु समास

समास का वह रूप, जिसमें पूर्वपद ‘संख्यावाचक’ होता है, उसे ‘द्विगु समास’ कहते है। द्विगु समास में कभी-कभी उत्तरपद भी ‘संख्यावाचक’ हो सकता है।

Examples – 

समाससमास-विग्रह
पंचतंत्रपाँच तंत्रों का समाहार
त्रिवेणीतीन वेणियों का समाहार
पंचवटीपाँच वटों (वृक्षों) का समाहार
शताब्दीशत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समाहार
अष्टसिद्धिआठ सिद्धियों का समाहार
दोराहादो राहों का समाहार
नवरात्रनौ रात्रियों का समूह
पंचतत्वपाँच तत्वों का समूह
अष्टाध्यायीआठ अध्यायों का समाहार
त्रिभुवनतीन भुवनों (लोकों) का समूह
सतसईसात सौ (दोहों) का समाहार
चतुर्मुखचार मुखों का समूह
पंजाबपाँच आबों (नदियों) का समूह
नवनिधिनौ निधियों का समाहार
चारपाईचार पैरों का समाहार
दोपहरदो पहर का समाहार
चौमासाचार मासों का समूह
सप्ताहसात दिनों का समूह
त्रिफलातीन फलों का समाहार
नवरत्ननव रत्नों का समाहार
त्रिलोकतीन लोकों का समाहार
द्विगुदो गायों का समाहार
अठन्नीआठ आनो का समूह
नवग्रहनौ ग्रहों का समूह
शताब्दीसौ वर्षों का समूह
सप्तऋषिसात ऋषिओं का समूह
त्रिकालतीन कालों का समाहार
त्रिपादतीन पैरों का समाहार
त्रिकोणतीन कोण का समाहार
तिराहातीन राहों का संगम
त्रिमूर्तितीन मूर्तियों का समूह
त्रिपाठीतीन पाठो (तीन वेदों) को जानने वाला
एकांकीएक अंक का नाटक
इकताराएक तारा
द्विगुदो गायों का समाहार
दुअन्नीदो आना का समाहार
द्विवेदीदो वेदों को जानने वाला
चवन्नीचार आनों का समाहार
चौकड़ीचार कड़ियों वाली
चतुर्वेदचार वेद
प्रचपात्रपाँच पात्र
प्रट्कोणषट् (छह) कोणों का समाहार
नौलखानौ लाख के मूल्य का समाहार

4. द्वन्द्व समास(dwand samas)

समास का वह रूप जिसमें प्रथम और द्वितीय दोनों पद प्रधान होते हैं उसे dwand samas कहते हैं। जैसे: आजकल (आज और कल), अच्छा-बुरा (अच्छा या बुरा, अच्छा और बुरा), आगा-पीछा, नीचे-ऊपर, दूध-रोटी आदि ।

Examples- 

  • घर-द्वार = घर और द्वार
  • घी-शक्कर = घी और शक्कर
  • दाल-रोटी = दाल और रोटी
  • देश-विदेश = देश और विदेश
  • खट्टा-मीठा = खट्टा और मीठा
  • गुण-दोष = गुण और दोष
  • पति-पत्नी = पति और पत्नी
  • लोभ-मोह = लोभ और मोह
  • माँ-बाप = माँ और बाप
  • पूर्व-पश्चिम = पूर्व और पश्चिम
  • पाप-पुण्य = पाप या पुण्य
  • छोटा-बड़ा = छोटा या बड़ा
  • आना-जाना = आना और जाना
  • दूध-दही = दूध और दही
  • गंगा-यमुना = गंगा और यमुना
  • ज्ञान-विज्ञान = ज्ञान और विज्ञान
  • तिर-सठ = तीन और साठ
  • कटोरा-लत्ता = कटोरा लत्ता आदि
  • सागपात = सागपात आदि
  • खरा- खोटा = खरा और खोटा
  • स्वर्ग-नरक = स्वर्ग और नर्क
  • भाई-बहन = भाई और बहन
  • आटा-दाल = आटा और दाल
  • तन-मन-धन = तन मन और धन
  • उन्नतावनत = उन्नत और अवनत
  • शस्त्रास्त्र = शस्त्र या अस्त्र
  • इधर-उधर = इधर या उधर
  • नीचे-ऊपर = नीचे या ऊपर
  • खरा-खोटा = खरा या खोटा
  • रूपया-पैसे = रूपया और पैसा

5. बहुव्रीहि समास(bahuvrihi samas)

यदि किसी सामासिक पद में प्रयुक्त प्रथम एवं द्वितीय दोनों पद अपना मूल अर्थ खोकर अन्य अर्थ प्रकट करने लगे तो उसे bahuvrihi samas कहते हैं।

bahuvrihi samas ke udaharan

  • नाकपति -वह जो नाक (स्वर्ग) का पति है इन्द्र
  • विषधर – विष को धारण करने वाला साँप
  • वज्रपाणि – वह जिसके पाणि (हाथ) में वज्र है- इन्द्र
  • वज्रायुध – वह जिसके वज्र का आयुध- इन्द्र
  • शचीपति – वह जो शची का पति है-इन्द्र
  • सहस्राक्ष – वह जिसके सहस्र (हजार) अक्षि (आँखें हैं- इन्द्र
  • ब्रजवल्लभ – वह जो ब्रज का वल्लभ (स्वामी) है कृष्ण
  • चक्रधर – चक्र धारण करने वाला श्री कृष्ण
  • नंदनंदन – वह जो नंद का नंदन (पुत्र) है – कृष्ण
  • पतझड़ – झड़ते हैं पत्ते जिसमें वह ऋतु वसंत
  • मुरारि – वह जो मुर (राक्षस का नाम) के अरि (शत्रु) हैं कृष्ण
  • दीर्घबाहु दीर्घ हैं बाहु जिसके विष्णु
  • कुसुमशर – वह जिसके कुसुम के शर (बाण) हैं- कामदेव
  • पंचशर – वह जिसके पाँच (पाँच फूलों के) शर हैं- कामदेव
  • पुष्पधन्वा – वह जिसके पुष्पों का धनुष है- कामदेव
  • मकरध्वज वह जिसके मकर का ध्वज है – कामदेव
  • रतिकांत – वह जो रति का कांत (पति) है – कामदेव पतिव्रता -एक पति का व्रत लेने वाली वह स्त्री
  • आशुतोष शीघ्र (आशु) तुष्ट हो जाते हैं जो शिव

6. अव्ययीभाव समास

जहाँ प्रथम पद या पूर्व पद प्रधान हो तथा समस्त पद क्रिया विशेषण अव्यय हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

avyayibhav samas ke udaharan

  • निस्संदेह : बिना संदेह के
  • बेशक : बिना शक के
  • बेनाम : बिना नाम के
  • बेकाम : बिना काम के
  • बेलगाम : लगाम के बिना
  • भरपेट : पेट भर कर
  • भरपूर : पूरा भर के
  • रातभर : पूरी रात

समास के प्रयोग (Practical Usage of Samas)

समास शब्द-रचना की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अर्थ की दृष्टि से परस्पर भिन्न तथा स्वतंत्र अर्थ रखने वाले दो या दो से अधिक शब्द मिलकर किसी अन्य स्वतंत्र शब्द की रचना करते हैं। समास विग्रह सामासिक शब्दों को विभक्ति सहित पृथक करके उनके संबंधों को स्पष्ट करने की प्रक्रिया है। यह समास रचना से पूर्ण रूप से विपरित प्रक्रिया है।
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Conclusion:

समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो हमें भाषा को सुंदर, सुसंगत, और तार्किक बनाने में हेल्प करता है। इस ब्लॉग पोस्ट में हमने Samas Kise Kahate Hain(समास की परिभाषा), प्रकार, और प्रयोग को विस्तार से समझाया है। हमने तत्पुरुष समास, कर्मधारय समास, द्विगु समास, द्वन्द्व समास, बहुव्रीहि समास, अव्ययीभाव समास के उदाहरण दिए हैं और साथ ही सामासिक विग्रह और समास के प्रयोग के बारे में भी विस्तार से बात की है। इसे पढ़कर आप समास के महत्वपूर्ण तत्वों को समझ पाएंगे और अपनी भाषा के उपयोग में सुधार कर पाएंगे।

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